sad shayari, N jane kyo aaj apna..

💚😰न जाने क्यों आज अपना ही घर मुझे अनजान सा लगता है

💙😰तेरे जाने के बाद ये घर-घर नहीं खली मकान सा लगता है

इस बहते “दर्द” को मत रोको…ये तो “सजा” है…किसी के “इंतज़ार” की…..
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लोग इन्हे आंसू “कहे” या “दीवानगी”…पर ये तो “निशानी” हैं…किसी के “प्यार” की

झूठे हैं वो जो कहते हैं कि…
हम सब मिट्टी से बने हैं।
मैं कई अपनों से वाक़िफ़ हूँ…
जो पत्थर के बने हैं।।

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